मंत्री ने किया वाटरशेड महोत्सव का उद्घाटन, मिट्टी-जल संरक्षण पर जोर
वर्षा जल संरक्षण से आई सिंचाई क्रांति, बिहार के 18 जिलों में 35 योजनाएं सक्रिय
पटना : राज्य के 18 जिलों के लिए वाटरशेड कार्यक्रम चल रहा है। इस कार्यक्रम के जरिए 35 योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिससे वर्षा जल संचयन किया जा रहा है। बामेती पटना में आयोजित राज्यस्तरीय वाटरशेड महोत्सव-2026 में ये बातें कही गई। इस कार्यक्रम का उद्घाटन कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने किया। महोत्सव में उन्होंने कहा कि जल का संरक्षण हमारी संस्कृति का हिस्सा है। भारत नदियों का देश है और बिहार नदियों का राज्य। हमारी सांस्कृतिक परंपरा में नदी, तालाब, कुआं, पेड़ और धरती को पूजनीय माना गया है। प्रकृति की रक्षा ही हमारी सांस्कृतिक विरासत है। इस पंचवर्षीय योजना के लिए भारत सरकार द्वारा 440 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इसके अंतर्गत 496 हेक्टेयर में पौधारोपण, 282 पक्के चेक डैम, 62 खेत तालाब, 361 जल संचयन तालाब, 756 आहर-पईन का जीर्णोद्धार तथा 344 कुओं का निर्माण/जीर्णोद्धार किया गया है।
वर्षा जल संचयन कर सिंचाई क्षमता होगा सृजन, योजना का मुख्य उद्देश्य
पांच साल की इस योजना की शुरुआत 2021-22 में हुई थी, इस वर्ष 2025-26 में यह समाप्त होगी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य जन भागीदारी को बढ़ा कर वर्षा जल संचयन कर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता का सृजन करना है। साथ ही भूजल स्तर बढ़ाने और मिट्टी के कटाव को रोकने की कोशिश भी है। नए वित्तीय वर्ष में पीएमकेएसवाई 3.0 की शुरुआत होगी। महोत्सव में कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने कहा कि अब तक जल संरक्षण की बात होती रही है लेकिन अब जल संरक्षण के साथ ही भूमि संरक्षण के लिए भी काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आज के समय में मिट्टी की उपरी परत जिसे बनने में सदियों लग जाते हैं वह नष्ट हो रही है। मिट्टी की यह उपरी परत कृषि के लिए महत्वपूर्ण है इसे संरक्षित करने को लेकर हमें विचार करना होगा। आने वाले समय में कृषि विभाग मिट्टी संरक्षण के लिए कई काम करेगा। इस महोत्सव में बड़ी संख्या में कृषि विभाग समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद थे।
42 का शिलान्यास और 61 कार्यों का हुआ लोकार्पण
इस मौके पर वाटरशेड योजना के अंतर्गत 42 विकासात्मक कार्यों का शिलान्यास एवं 61 कार्यों का लोकार्पण उन्होंने किया। वहीं योजनाओं की लाभुक महिलाओं के द्वारा जल कलश यात्रा निकाली गई। साथ ही, योजना की उपलब्धियों और प्रेरणादायी अनुभवों को समाहित करती ‘सफलता की कहानियां’ पुस्तक का विमोचन किया गया। वाटरशेड से जुड़े कार्यों, नवाचारों और प्रभावों को दर्शाने वाले सूचनात्मक वीडियो का प्रदर्शन भी किया गया। कृषि विभाग की भूमि संरक्षण से संबंधित विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित प्रगतिशील किसानों ने इस कार्यक्रम के दौरान मंच से अपने अनुभव साझा किए तथा योजनाओं के सकारात्मक प्रभावों और उनसे हुए लाभों की जानकारी दी।
