उन्नत बीज, क्लस्टर खेती और प्रसंस्करण इकाइयों पर रहेगा फोकस

बाढ़-सुखाड़ को देखते हुए विशेष बीमा और नीति समर्थन की मांग

पटना : मध्य प्रदेश के सीहोर जिला के अमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र से शनिवार को देश की दलहन नीति एवं किसान-केंद्रित कृषि विमर्श में एक नया अध्याय जुड़ा है। यहां केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय दलहन परामर्श एवं रणनीति कार्यक्रम के माध्यम से देशव्यापी दलहन क्रांति का औपचारिक शुभारंभ हुआ। दलहन उत्पादन पर राज्य के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा है कि राज्य का लक्ष्य है कि अगले पांच वर्षों में बिहार को दलहन में आत्मनिर्भर राज्य बनाया जाए। दलहन आत्मनिर्भरता मिशन एक निर्णायक पहल है, जिसके तहत उन्नत बीज, क्लस्टर आधारित खेती, प्रशिक्षण, प्रसंस्करण इकाइयों की व्यवस्था की गई है।

उन्होंने बिहार में दलहन उत्पादन को बढ़ाने के लिए केंद्र से कई मांगें भी की है। उन्होंने कहा है कि, बिहार को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार से विशेष सहयोग एवं ठोस नीति समर्थन की आवश्यकता है। राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के अंतर्गत बिहार की भौगोलिक, जलवायु एवं कृषि संरचना को ध्यान में रखते हुए राज्य के लिए एक विशेष दलहन पैकेज स्वीकृत किया जाना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि बिहार को वर्षा-आधारित खेती वाला राज्य मानते हुए दलहन विकास के लिए अलग से विशेष पैकेज प्रदान किए जाने का अनुरोध किया गया है। अरहर, चना, मसूर, उड़द एवं मूंग को बिहार की राज्य-विशेष दलहन फसलों के रूप में चिन्हित किया जाना चाहिए। साथ ही, राज्य में दलहन उत्पादन को सुदृढ़ करने के लिए राष्ट्रीय स्तर के सीड हब की स्थापना तथा 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता से उच्च उत्पादक, अल्प अवधि एवं रोग-रोधी बीज किसानों को उपलब्ध कराए जाने की आवश्यकता है।

कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा है कि बिहार बाढ़ एवं सुखाड़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से बार-बार प्रभावित होता है, इसलिए दलहन फसलों के लिए कम प्रीमियम पर व्यापक फसल बीमा एवं मौसम आधारित क्षति पर त्वरित क्षतिपूर्ति की व्यवस्था की जाए। उन्होंने केंद्र–राज्य समन्वय को मजबूत करने के लिए बिहार के लिए केंद्र–राज्य संयुक्त दलहन टास्क फोर्स के गठन का भी प्रस्ताव रखा है।

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