पटना : राज्य में निजी वाहनों को व्यावसायिक प्रयोजनों में उपयोग करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर ग्रामीण विकास एवं परिवहन विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि अविलंब उन सभी एजेंसियों, वाहन मालिकों और संबंधित पक्षों के खिलाफ सुसंगत धाराओं के अंतर्गत सख्त कार्रवाई की जाए, जो निजी वाहनों का व्यावसायिक उपयोग कर रहे हैं। इससे सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है। उक्त बातें उन्होंने शनिवार को छपरा जिले में परिवहन विभाग के पदाधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में कही।

सरकारी विभागों में भी निजी वाहन

बैठक के दौरान जानकारी दी गई कि राज्य के विभिन्न जिलों में कई एजेंसियां सरकारी विभागों (जैसे खनन विभाग, पर्यटन विभाग), प्राइवेट होटलों और अन्य संस्थाओं के लिए व्यावसायिक वाहनों के स्थान पर निजी वाहन उपलब्ध करा रही हैं। साथ ही, कई वाहन मालिक और एजेंसियां निजी वाहनों का व्यावसायिक उपयोग कर रही हैं। मंत्री ने इस स्थिति पर खेद व्यक्त करते हुए कहा कि व्यावसायिक वाहनों के लिए फिटनेस प्रमाण-पत्र प्राप्त और परमिट दोनों ही लेना अनिवार्य है। नियमों के अनुसार: 8 वर्ष से कम पुराने व्यावसायिक वाहनों के लिए हर 2 वर्ष में फिटनेस प्रमाण-पत्र और 8 वर्ष से अधिक पुराने वाहनों के लिए हर वर्ष फिटनेस प्रमाण-पत्र जारी किया जाता है।

इसके अलावा, स्टेज कैरेज, कॉन्ट्रैक्ट कैरेज और मालवाहक वाहनों और पर्यटन हेतु परिचालित वाहनों में परमिट अनिवार्य है। इन प्रमाण-पत्रों और परमिटों से सरकार को राजस्व प्राप्त होता है, लेकिन निजी वाहनों का व्यावसायिक उपयोग कर वंचना का यह गंभीर मामला बन रहा है। मंत्री श्री कुमार ने पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि इस दिशा में त्वरित जांच हो, ताकि नियमों का पालन हो और राज्य का राजस्व सुरक्षित रहे।

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