पटना।महीप राज। बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री और डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा के सख़्त रुख़ से विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। उनके कामकाज के तौर-तरीकों को लेकर अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास औपचारिक शिकायत तक पहुँचा दी गई है। जब से विजय कुमार सिन्हा ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की कमान संभाली है, तब से भ्रष्ट अधिकारियों के ख़िलाफ़ लगातार सख़्त कार्रवाई देखने को मिल रही है। कहीं ऑन द स्पॉट निलंबन, तो कहीं सुधार के लिए एक सप्ताह की मोहलत, मंत्री साफ़ कर चुके हैं कि लापरवाही और भ्रष्टाचार अब किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग लंबे समय से आम लोगों की परेशानी का सबसे बड़ा केंद्र रहा है। ज़मीन की दाखिल-खारिज, परिमार्जन या जमाबंदी जैसे कामों के लिए लोगों को महीनों चक्कर काटने पड़ते हैं। छोटी-छोटी प्रक्रियाओं के नाम पर आम नागरिकों को परेशान किया जाता है, जिससे वे मजबूर होकर दलालों का सहारा लेते हैं। इसका नतीजा यह हुआ कि विभाग में दलालों के ज़रिए डबल-ट्रिपल वसूली का खेल लंबे समय से चलता रहा।

एनडीए सरकार के प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आने के बाद यह विभाग भाजपा के खाते में गया और इसकी ज़िम्मेदारी पार्टी के सख़्त तेवरों के लिए पहचाने जाने वाले विधायक व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा को सौंपी गई। उनका मक़सद साफ़ था विभाग में जड़ जमा चुके भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करना। इसी क्रम में मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने न सिर्फ़ लगातार समीक्षा बैठकें कीं, बल्कि ‘भूमि सुधार जनकल्याण संवाद’ कार्यक्रम के ज़रिए आम लोगों के बीच जाकर ऑन द स्पॉट फ़ैसले लेने की पहल भी की। 18 दिसंबर को पटना के ज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने खराब प्रदर्शन करने वाले अंचल अधिकारियों और राजस्व कर्मियों से स्पष्टीकरण माँगा और चेतावनी दी कि सुधार नहीं हुआ तो सख़्त कार्रवाई तय है। 22 दिसंबर को मुजफ्फरपुर के बीआरए बिहार विश्वविद्यालय परिसर स्थित श्रीकृष्ण सिंह प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम में भी उन्होंने दो टूक कहा कि भ्रष्टाचार और भू-माफ़ियाओं से मिलीभगत किसी हाल में स्वीकार नहीं की जाएगी।

26 दिसंबर को पूर्णिया में हुए संवाद कार्यक्रम में कई पीड़ितोंख़ासकर वृद्ध महिलाओं ने अधिकारियों पर ज़मीन कब्ज़ाने के गंभीर आरोप लगाए। इस पर मंत्री का गुस्सा साफ़ दिखा और उन्होंने दोषी अधिकारियों को चिन्हित कर कार्रवाई का भरोसा दिलाया।

मंत्री की इस सख़्ती से नाराज़ अंचल अधिकारियों के एक समूह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि सार्वजनिक मंचों पर डांट-फटकार और कथित अपमान से वे आहत हैं, और अगर यह सिलसिला नहीं रुका तो वे हड़ताल पर जा सकते हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने साफ़ कहा कि उन्हें धमकियों से कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने 2017 का उदाहरण देते हुए कहा कि श्रम संसाधन मंत्री रहते हुए आईटीआई सुधार के दौरान भी उनका विरोध हुआ था, पुतले जलाए गए थे, लेकिन आज उसी सुधार का लाभ बिहार के युवाओं को मिल रहा है। उनका कहना था कि जब कोई ईमानदारी से व्यवस्था सुधारने का काम करता है, तो उसका विरोध स्वाभाविक है।

फिलहाल, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में जारी यह सख़्ती और उससे उपजा टकराव बिहार की राजनीति और प्रशासन दोनों में चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *