रोहिंग्या शरणार्थी होने के शक पर वीरगंज से भेजा गया वापस
रक्सौल : भारत निर्वाचन आयोग के द्वारा देश के अलग-अलग राज्यों में कराए जा रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य के बीच अवैध घुसपैठियों के द्वारा देश छोड़कर भागने की कोशिश लगातार जारी है. इस बीच बुधवार को रक्सौल से सटे नेपाल के वीरगंज शहर में उस वक्त अफरातफरी मच गई, जब 12 से 15 टांगा गाड़ी सवार पर लगभग 100 से अधिक रोहिंग्या शरणार्थी नेपाल में प्रवेश किए. हालांकि, बाद में उन्हें वापस भेज दिया गया. इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार बुधवार सुबह करीब 12–15 तांगों में सवार लगभग 100 रोहिंग्या शरणार्थियों के नेपाल में प्रवेश करने की सूचना मिलने पर स्थानीय लोगों ने उन्हें वीरगंज के बाइपास रोड स्थित नगवा के सामने रोककर पूछताछ की. पूछताछ के दौरान शरणार्थियों ने स्वयं को भारत के उत्तर प्रदेश का निवासी बताते हुए नेपाल में काम करने के उद्देश्य से प्रवेश करने की बात कही. हालांकि उनके बयान संदिग्ध पाए जाने पर स्थानीय लोगों ने उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया, जिसके बाद उन्हें भारत वापस भेज दिया गया. स्थानीय युवाओं ने रोहिंग्या शरणार्थियों को वीरगंज भंसार तक ले जाकर पुलिस को सौंपा. इस संबंध में स्थानीय निवासी रंजीत सर्राफ ने कहा वे खुद को उत्तर प्रदेश का निवासी बता रहे थे, लेकिन न तो वे ठीक से हिंदी बोल पा रहे थे और न ही उनके पास कोई स्पष्ट दस्तावेज थे. नेपाल में प्रवेश का उद्देश्य भी वे स्पष्ट नहीं कर सके, इसलिए हमें संदेह हुआ और उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया गया. इधर, इस घटना के बाद भारत और नेपाल की सीमा सुरक्षा में तैनात सशस्त्र सीमा बल और नेपाल सशस्त्र पुलिस बल पर लापरवाही का आरोप भी लगा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि खुली सीमा का लाभ उठाकर रोहिंग्या शरणार्थियों का इतना बड़ा समूह नेपाल में प्रवेश कर गया, लेकिन उचित जांच नहीं की गई. स्थानीय लोगों का आरोप है कि जहां आम नागरिकों से भारत से एक किलो चीनी लाने पर भी सख्त जांच की जाती है, वहीं इतने बड़े समूह के प्रवेश के दौरान कोई जांच नहीं हुई. सशस्त्र प्रहरी बल नेपाल के प्रस्तावित सीमा सुरक्षा गुल्म, वीरगंज के अनुसार प्रारंभिक जांच में शरणार्थियों ने उत्तर प्रदेश में रहने का दावा किया था, लेकिन उनकी गतिविधियों और बयानों में असंगति पाए जाने के कारण सुरक्षा संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए उन्हें भारत वापस भेज दिया गया. सुरक्षा निकायों का कहना है कि सीमा क्षेत्र से अवैध रूप से प्रवेश करने, शरणार्थी के रूप में बसने की कोशिश करने या सुरक्षा चुनौती उत्पन्न कर सकने वाली गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों पर निगरानी कड़ी कर दी गई है. हाल के दिनों में सीमा क्षेत्र में इस तरह के समूहों की आवाजाही बढ़ने के कारण सुरक्षा एजेंसियां सतर्क बनी हुई हैं. वहीं इस संबंध में भारतीय प्रशासन के द्वारा किसी भी तरह की औपचारिक जानकारी होने से इंकार किया गया है. वहीं, एक टांगा चालक ने बताया कि दूसरे टांगा से ये लोग सुबह में ही वीरगंज आए थे, लेकिन बाद में इनको शक होने पर स्थानीय लोग वापस भेज दिए. इसकी भाषा स्थानीय लोगों की तरह नहीं लग रही थी.

वापसी के बाद रक्सौल बॉर्डर पर खड़ा टांगा.
