बिहार के छोटे किसान अब बड़े मशीनों के मालिक–कैसे?
लघु एवं सीमांत किसानों को मिलेगी आधुनिक कृषि यंत्रों की सुविधा : राम कृपाल यादव
पटना : राज्य सरकार कृषि रोड मैप के जरिए किसानों की आय बढ़ाने का प्रयास कर रही है। इसी क्रम में विभाग ने लघु एवं सीमांत किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों की सुलभ उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए इस वित्तीय वर्ष यानी 2025-26 में राज्य में कुल 267 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। अब तक इसके विरुद्ध ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से 221 किसानों का चयन कर उन्हें स्वीकृति पत्र निर्गत किया जा चुका है।
कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने बताया कि कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना से किसानों को जुताई, बुआई/रोपनी, कटाई, मड़ाई(थ्रेसिंग) जैसी सभी प्रमुख कृषि गतिविधियों के लिए आधुनिक मशीनें किराये पर उपलब्ध होंगी। इससे न केवल खेती की लागत में कमी आएगी, बल्कि समयबद्ध कृषि कार्य होने से फसल की गुणवत्ता एवं पैदावार में भी सुधार होगा।
कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना के लिए अधिकतम 10 लाख रुपये की परियोजना लागत निर्धारित की गई है। इस परियोजना के अंतर्गत स्थानीय फसल चक्र के अनुरूप ट्रैक्टर चालित अथवा स्वचालित जुताई, बुआई/रोपनी, हार्वेस्टिंग एवं थ्रेसिंग से संबंधित प्रत्येक कृषि क्रिया के लिए कम-से-कम एक-एक यंत्र लेना अनिवार्य है। 10 लाख रुपये की परियोजना लागत पर 35 बीएचपी अथवा उससे अधिक क्षमता के ट्रैक्टर पर अधिकतम 1,60,000 रुपये तथा अन्य कृषि यंत्रों पर 40 प्रतिशत अनुदान दिया मिलता है। इस प्रकार एक कस्टम हायरिंग सेंटर पर अधिकतम 4.00 लाख रुपये तक का अनुदान उपलब्ध कराया जाता है।
मंत्री ने बताया कि इस योजना का लाभ प्रगतिशील कृषक, जीविका समूह, ग्राम संगठन, क्लस्टर फेडरेशन, आत्मा से संबद्ध फार्मर इंटरेस्ट ग्रुप (एफआईजी), नाबार्ड/राष्ट्रीयकृत बैंकों से संबद्ध किसान क्लब, फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (एफपीओ), फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (एफपीसी), स्वयं सहायता समूह तथा पैक्स ले सकते हैं। कस्टम हायरिंग सेंटर योजना से बिहार के किसानों को आधुनिक कृषि की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा और राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्राप्त होगी।
