कभी उपेक्षित रहे कुएं, तालाब और आहर अब फिर से बन रहे जीवन का आधार

साढ़े पांच साल में राज्यभर के करीब 38 हजार कुओं का हो चुका कायाकल्प

पटना : बिहार की पारंपरिक जल-संस्कृति एक बार फिर जीवंत हो उठी है। जिन कुओं का पानी सूखने लगा था, जिन तालाबों और आहरों पर कब्ज़े और उपेक्षा की धूल जम गई थी। वे जल स्रोत अब फिर से लहलहाने लगे हैं। जल जीवन हरियाली मिशन के तहत पिछले साढ़े पाँच वर्षों में राज्य ने जिस गति से अपने पारंपरिक जल संसाधनों को संवारा है, वह मिसाल बनने योग्य है।

राज्यभर में चिन्हित 38,629 कुओं में से 37,995 का जीर्णोद्धार पूरा हो चुका है, जबकि शेष 293 कुओं पर काम तेज गति से जारी है। यह मिशन 25 सितंबर 2019 को ग्रामीण विकास विभाग सहित कई विभागों के संयुक्त सहयोग से शुरू किया गया था। मंजूरी मिलने के बाद योजना ने रफ़्तारपकड़ी और कुओं से अतिक्रमण हटाने से लेकर संरक्षण तक का पूरा रोडमैप तैयार किया गया।

योजना के बजट में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई। प्रारंभिक राशि 1,359 करोड़ रुपये से बढ़ाकर वित्त वर्ष 2024–25 में 12,568 करोड़ रुपये कर दी गई, जो लगभग नौ गुना अधिक है। अतिरिक्त संसाधनों का सीधा असर ज़मीन पर दिख रहा है। आज अधिकांश कुएं और जल स्रोत नए रूप में लोगों को लाभ पहुंचाने लगे हैं।

अतिक्रमण हटाने का सबसे बड़ा अभियान

राज्य के 11,192 सरकारी कुओं में से 11,181 को अतिक्रमण मुक्त कराया जा चुका है। बाकी 11 कुओं पर प्रक्रिया चल रही है। इसी तरह 17,454 तालाब, पोखर, आहर, पईन और अन्य जल स्रोतों से अवैध कब्ज़ा हटाकर उनका पुनर्निर्माण पूरा किया गया है।

2019 में मिशन शुरू होने के बाद पहली बार पूरे राज्य में ऐसे उपेक्षित और कब्ज़ा-किए गए जल स्रोतों की विस्तृत पहचान की गई। सालों से उपेक्षा के शिकार ये पौराणिक जल संसाधन अब पुनर्जीवित होकर फिर से जीवनदान देने की स्थिति में आ गए हैं।

ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पुराना अतिक्रमण हटाना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन मुख्यमंत्री वास स्थल क्रय सहायता योजना इसमें बेहद उपयोगी साबित हुई। जिन परिवारों के पास रहने की अपनी जमीन नहीं थी, उन्हें एक लाख रुपये की सहायता देकर वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया गया। इससे जल स्रोतों को मुक्त कराने और दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित करने में बड़ी मदद मिली। बिहार के लिए यह प्रयास भविष्य की जल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो रहा है।

“पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जलवायु परिवर्तन और भूजल स्तर में गिरावट जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है। कई कार्य पूरे भी हो चुके हैं और शेष को जल्द पूरा किया जाएगा।”

श्रवण कुमार, ग्रामीण विकास एवं परिवहन मंत्री

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