राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्र, कांटी की जमीन निजी व्यक्ति के नाम दाखिल-खारिज का मामला, अंचलाधिकारी को कर दिया गया है निलंबित

पटना : मुजफ्फरपुर जिले के काँटी अंचल अंतर्गत राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्र, काँटी की 44 डिसमिल सरकारी जमीन को निजी व्यक्ति के नाम दाखिल-खारिज किए जाने के मामले में गंभीर प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है। स्वत्व वाद संख्या 303/2018 (नवीन कुमार बनाम राज्य सरकार) में दिसंबर 2023 में पारित आदेश के आलोक में अंचलाधिकारी, काँटी द्वारा राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्र के नाम से दर्ज कुल 6 एकड़ जमीन में से 44 डिसमिल भूमि का दाखिल-खारिज निजी व्यक्ति के पक्ष में कर दिया गया। नियमों के अनुसार इस प्रकरण में सर्वप्रथम विधिक मंतव्य प्राप्त कर सक्षम न्यायालय में अपील दायर किया जाना आवश्यक था, लेकिन अंचलाधिकारी, काँटी द्वारा ऐसा नहीं किया गया और सीधे सरकारी कृषि भूमि का दाखिल-खारिज कर दिया गया। इस मामले को गंभीर मानते हुए अपर समाहर्ता, मुजफ्फरपुर से जांच कराई गई।

अपर समाहर्ता, मुजफ्फरपुर द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट रूप से यह प्रतिवेदित किया गया कि अंचलाधिकारी, काँटी ने विभागीय प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए कृषि विभाग की भूमि का दाखिल-खारिज निजी व्यक्ति के पक्ष में किया गया है। जांच प्रतिवेदन के आधार पर जिलाधिकारी, मुजफ्फरपुर द्वारा अपर मुख्य सचिव, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार, पटना को वस्तुस्थिति से अवगत कराया गया तथा तत्कालीन अंचलाधिकारी, काँटी के विरुद्ध कार्रवाई का अनुरोध किया गया। जांचोपरांत विभाग द्वारा तत्कालीन अंचलाधिकारी, काँटी को निलंबित कर दिया गया।

इधर, स्वत्व वाद संख्या 303/2018 में विद्वान सब जज, मुजफ्फरपुर द्वारा पारित आदेश के विरुद्ध माननीय उच्च न्यायालय, पटना में अपील दायर करने की प्रक्रिया भी तेज की गई। इस संबंध में पत्रांक 2626, दिनांक 02.09.2025 के माध्यम से प्रधान सचिव, कृषि विभाग, बिहार, पटना से पत्राचार कर ग्राउंड्स ऑफ अपील तैयार किए गए। इसके पश्चात विद्वान महाधिवक्ता, बिहार, पटना द्वारा विधिक मंतव्य देते हुए अविलंब अपील दायर करने की सलाह दी गई।

महाधिवक्ता के मंतव्य के आलोक में जिला कृषि पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर द्वारा प्रथम अपील वाद संख्या 195/2025 माननीय उच्च न्यायालय, पटना में दायर की गई है। वर्तमान में यह फर्स्ट अपील माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। प्रशासनिक हलकों में इस पूरे मामले को सरकारी कृषि भूमि के संरक्षण से जुड़ा गंभीर प्रकरण माना जा रहा है, जिस पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया और विभागीय कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

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