गांव की सड़कों पर नजर रखेगी तीसरी आंख, सड़क खराब तो ठेकेदार, इंजीनियर और अफसर खबरदार!
क्यूआर कोड से होगी सड़क की निगरानी, अफसर-ठेकेदार सतर्क
AI देखेगा गांव की सड़कें, शिकायत सीधी विभाग तक
पटना : बिहार में अब यदि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के अंतर्गत बनाई गई सड़क खराब तो ठेकेदार, इंजीनियर और अफसर खबरदार! इन सड़कों पर नजर रखने के लिए अब आमलोगों की तीसरी आंख भी काम करेगी। लोग खराब सड़क की शिकायत क्यूआर कोड के जरिए कर सकते हैं। लोगों द्वारा भेजी गईं तस्वीरों का विश्लेषण ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिए किया जा रहा है।बता दें कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत निर्मित सडकों के लिए क्यूआर कोड के जरिए निरीक्षण की व्यवस्था की शुरुआत बिहार के पांच जिलों सीवान, सुपौल, जमुई, गया और मुंगेर से शुरू की गई थी, जो अब राज्य के कुल 23 जिलों में लागू हो चुकी है। शेष अन्य 15 जिलों में भी यह व्यवस्था जल्द ही लागू कर दी जाएगी। फिलहाल सबसे अधिक क्यूआर कोड गयाजी जिले में लगाए गए हैं। गयाजी में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत निर्मित कुल 74 सड़कों पर क्यूआर कोड लगा दिए गए हैं। इसी तरह कटिहार में निर्मित कुल 60, मधेपुरा में 59, औरंगाबाद में 54, समस्तीपुर में 39, रोहतास में 25, वैशाली में 22, पटना व दरभंगा में 19-19, सिवान में 17, बांका व बेगूसराय में 16-16, बक्सर, मधुबनी व मुजफ्फरपुर में 14-14, जमुई में 11, पूर्णिया में 10, भोजपुर में 8, पूर्वी चंपारण व सुपौल में 7-7, सारण में 6 और मुंगेर व शिवहर में 4-4 ग्रामीण सड़कों के मुहानों पर नोटिस बोर्ड लगाकर क्यूआर कोड चस्पा कर दिया है। जिसे कोई भी ग्रामीण स्कैन करके सड़क के संबंध में अपनी शिकायत या सुझाव सीधे विभाग को भेज सकता है।
एक स्कैन और खराब सड़क की खुलेगी पोल
बिहार में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत निर्मित किसी भी सड़क की गुणवत्ता को लेकर शिकायत या सुझाव नोटिस बोर्ड पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करके की जा सकती है। इन सड़कों के रखरखाव को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए अब आम लोगों को इनकी निगरानी में भागीदार बनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत बनाई गईं सड़कों के रखरखाव के लिए क्यूआर कोड आधारित फीडबैक व्यवस्था लागू की गई है। बिहार के ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से विभाग के सभी कार्य प्रमंडलों के कार्यपालक अभियंताओं को पहले ही निर्देश जारी कर दिया है कि वे ई-मार्ग पोर्टल से जनरेट किए गए क्यूआर कोड को सड़क किनारे लगे रखरखाव सूचना पट्ट पर अनिवार्य रूप से लगाने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
तस्वीरें भेजकर बताई जा रही ग्रामीण सड़कों की खामियां
जब भी कोई व्यक्ति बोर्ड पर अंकित क्यूआर कोड स्कैन करेगा, तो उसे संबंधित सड़क का पूरा ब्यौरा मिल जाएगा। वह सड़क पर गड्ढे या अन्य खामियों की फोटो लेकर उसे फीडबैक विंडो के जरिए अपलोड कर सकेगा। यह प्रतिक्रिया सीधे विभाग को मिलेगी। यानी आम नागरिक और विभागीय मुख्यालय के बीच कोई नहीं होगा। इसके लिए हर ग्रामीण सड़क का एक खास क्यूआर कोड बनाया गया है। आमलोगों की ओर से भेजी जाने वाली तस्वीरों, शिकायतों व सुझावों को नियमित निरीक्षण प्रक्रिया से जोड़ा गया है।
