ग्रामीण बिहार को मिली नई रफ्तार, 72 सड़क योजनाओं को हरी झंडी

पटना : बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध यातायात सुलभ कराने के लिए पंचायतों, प्रखंडों, अनुमंडलों, जिलों के महत्वपूर्ण प्रशासनिक संस्थानों को बारहमासी ग्रामीण सड़कों से जोड़ा जा रहा है। जिससे ग्रामीण आबादी के लिए अस्पताल, शिक्षण संस्थान, बाजार, बैंक और पर्यटन स्थलों तक पहुंचने की सुविधा को और अधिक सरल बनाया जा सके। बिहार सरकार की इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों के महत्वपूर्ण स्थानों को वैकल्पिक मार्ग से जोड़ना है। जिससे ग्रामीण संपर्कता सुलभ हो सके। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इसके तहत कुल 72 योजनाओं का चयन किया गया है, जिसमें 65 योजनाओं की प्रशासनिक स्वीकृति भी दे दी गई है। इस योजना के तहत जिले के सभी महत्वपूर्ण प्रशासनिक संस्थान तथा विभिन्न महत्वपूर्ण सुविधाएं जैसे अस्पताल, शिक्षण संस्थान, हाट, बाजार, बैंक और पर्यटन स्थल को उच्च स्तर पथों यथा राष्ट्रीय उच्च पथ, राज्य उच्च पथ, वृहद जिला पथ से जोड़ने की योजना शुरू की गई है। ग्रामीण सड़कों को उपरोक्त महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय पथ से जोड़ा जायेगा।

72 योजना को मिली प्रशासनिक स्वीकृति 515 करोड़ की अधिक लागत से होगी आधारभूत व्यवस्था

इसके तहत ग्रामीण कार्य विभाग ने अबतक कुल 72 योजनाओं को अपनी प्रशानिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इस पर कुल 515 करोड़ रूपये से भी अधिक की धनराशि खर्च की जा रही है। इनमें कुल 13 योजनाओं का निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया गया है। सुलभ संपर्कता योजना के तहत राज्य के कुल 24 जिलों में 254.40 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जाएगा। जिसमें सबसे अधिक 20 योजनाएं राजधानी पटना की हैं। पटना में कुल 25.115 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया जाएगा। इसी तरह लखीसराय जिले की कुल 14 योजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है। जबकि नालंदा में सात, जहानाबाद में 6, समस्तीपुर में 5, पश्चिमी चंपारण और बांका में क्रमश: तीन-तीन, भोजपुर, गयाजी, कटिहार और गोपालगंज में क्रमश: दो-दो और सारण, सासाराम, औरंगाबाद, अरवल, शेखपुरा, बेगूसराय और पूर्वी चंपारण जिले में क्रमश: एक-एक योजना को स्वीकृति प्रदान की गई है।

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