पंचायती राज संस्थाओं से संबंधित बिंदुवार एजेंडा पर हुआ विचार-विमर्श

पटना : सोमवार को पटना स्थित होटल चाणक्य में सप्तम राज्य वित्त आयोग के समक्ष पंचायती राज विभाग और अन्य 11 विभागों के प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार ने आयोग के अध्यक्ष अशोक कुमार चौधरी के समक्ष विभाग की कार्यप्रणाली, अंतर्विभागीय समन्वय, विभाग द्वारा क्रियान्वित जनकल्याणकारी योजनाएं और राज्य के त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं की ओर से किए जा रहे कार्य व योजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान आ रही चुनौतियों से संबंधित प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया।

मौके पर उन्होंने कहा कि राज्य के त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए विभाग प्रतिबद्ध है। राज्य के त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थान आय के निजी स्रोत (ओएसआर) विकसित कर सकें, उनके माध्यम से आय अर्जित कर सकें और कर व शुल्क वसूली का अधिकार प्राप्त कर सकें, इसे सुनिश्चित करने के लिए विभाग नियमावली का निर्माण कर रहा है।

ग्राम पंचायतों को राजस्व के श्रोत

उन्होंने आगे बताया कि वर्तमान में ग्राम पंचायतों के लिए मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना के तहत प्रत्येक उपभोक्ता परिवार से उपभोक्ता शुल्क के रूप में 30 रुपये प्रतिमाह वसूल किए जाने का प्रावधान है। सैरातों के बंदोबस्ती की शक्ति ग्राम पंचायतों को प्रदान की गई है। जन्म/मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत करने की व्यवस्था भी विभाग द्वारा की गई है, यह भी शुल्क के रूप में ग्राम पंचायतों को राजस्व अर्जित करने में सहायक है। मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना-3 के अंतर्गत विभाग की ओर से ग्राम पंचायतों में मोक्षधाम स्थल निर्माण और अनुरक्षण व ग्रामीण हाट बाजार विकसित किया जाना है। इसके लिए भी विभाग नियमावली तैयार कर रहा है।

बैठक में सचिव ने राज्य के त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं में आधारभूत संरचनाओं के विकास, पंचायत सरकार भवन, मुख्यमंत्री कन्या विवाह मंडप के साथ-साथ पंचायत के अधीन अन्य भवन के अनुरक्षण, कार्यालय संचालन व मानव बल प्रबंधन के लिए प्रस्ताव में वर्णित प्रावधान के अतिरिक्त राशि प्रदान करने सहित विद्युत विपत्र (पंचायत स्तरीय कार्यालय और पेयजल योजनाओं के भुगतान, कम्प्यूटराइजेशन व आईटी प्रबंधन, स्वच्छता, जल प्रबंधन और ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोत के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त राशि का प्रावधान सप्तम राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा में जोड़ने का आग्रह किया। ताकि पंचायती राज संस्थाओं का तीव्र गति से विकास हो सके। राज्य वित्त आयोग द्वारा पंचायती राज संस्थाओं के विकास के लिए प्रदत्त डेवलपमेंट ग्रांट को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने का आग्रह भी सचिव, पंचायती राज विभाग, बिहार द्वारा किया गया। राज्य के त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के लिए प्रदर्शन आधारित अनुदान, प्रोत्साहन और पुरस्कार से संबंधी प्रावधानों को सप्तम राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा में जोड़ने का भी अनुरोध विभागीय सचिव ने किया।

अध्यक्ष ने तकनीक आधारित गवर्नेंस की सराहना की

बैठक में सप्तम राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि आयोग की अनुशंसा विकसित बिहार के लक्ष्य के अनुरूप होगी। ग्राम पंचायतों के विकास के बिना विकसित बिहार के लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सकता है। उन्होंने पंचायती राज विभाग द्वारा तकनीक आधारित गवर्नेंस सुनिश्चित करने के दिशा में किये गए प्रयास जैसे ई-पंचायत बिहार पोर्टल, पंचायत ई-ग्राम कचहरी और राज्य के त्रि -स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के जन प्रतिनिधियों व कर्मियों के क्षमता संवर्धन के लिए राज्य के अंदर व बाहर देश के प्रतिष्ठित संस्थाओं में नियमित रूप से प्रशिक्षण-सह-एक्सपोजर कार्यक्रम आयोजित करने की सराहना की। साथ ही, उन्होंने 11 विभागों के प्रतिनिधि पदाधिकारियों को पांच दिनों के अंदर विस्तृत प्रतिवेदन प्रदान करने का निदेश दिया। इसके अलावा अन्य पदाधिकारियों से सप्तम राज्य वित्त आयोग की वेबसाईट(7thsfc.bihar.gov.in) पर सुझाव देने का भी आग्रह किया।

बैठक में सप्तम राज्य वित्त आयोग की सदस्य कुमुदनी सिन्हा और अनिल कुमार उपस्थित थे। इनके साथ ही पंचायती राज विभाग के निदेशक नवीन कुमार सिंह, अपर सचिव डॉ. आदित्य प्रकाश, अपर सचिव नज़र हुसैन, संयुक्त सचिव शम्स जावेद अंसारी समेत अन्य विभागों के पदाधिकारी मौजूद रहे।

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